सिखवाल इतिहास (History)

श्रृंगी ऋषि एक महान भारतीय हिन्दू ऋषि थे और ऋषि कश्यप के वंशज थे! ऋषि विभंडक के पुत्र थे! सतयुग में राजा दशरथ ने जब पुत्रकामेष्टि यज्ञ का आह्वान किया था तब ऋषि श्रृंग द्वारा ही इस यज्ञ का संचालन किया गया था! इसी यज्ञ से राजा दशरथ को चार पुत्रों के प्राप्ति हुई थी! ऋषि श्रृंग इस काल में "मंत्र विज्ञान" के "प्रतिष्ठित विशेषज्ञ" थे! ऋषि श्रृंग और माता शांता से ही सिखवाल वंश की उत्पति हुई!

बारहा दिन तक चले इस यज्ञ के दोरान राजा दशरथ की बहन राजकुमारी शांता श्रृंग ऋषि पर मोहित हो गई, तत पश्चात् पूर्णाआहुति के दिन राजा दशरथ ने श्रृंग ऋषि के शमक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा जीसे श्रृंग ऋषि ने सहर्ष स्वीकार किया, माता शांता ने आठ अति वैदिक पुत्रों को जन्म दिया इसी से सिखवाल (सुखवाल, श्रृंगी) वंश के उत्पति हुई!

श्रृंग ऋषि का एक पोराणिक मन्दिर कुल्लू के पास "बंजर" (हिमाचल प्रदेश) में स्थित है! हर वर्ष मई में यहाँ एक मेले का आयोजन होता है!

एक प्रश्न आप के मन में जरूर आएगा कि एक ही माता की संतान है फिर अलग-अलग कुलमाता क्यो, इस का निवारण यह है कि कालांतर में राक्षसों द्वारा किए जाने वाले अत्याचार के कारण ऋषियो ने देवताओ से रक्षा करने कि प्रार्थना की देवताओं ने लाचार होकर कहा कि आप देवियों कि शरण में जाओ, अत: जिस देवी ने जिस कुल को बचाया वही उस कुल की कुलदेवी कहलाई!